Hindi Grammar भाषा, लिपि और व्याकरण

Hindi Grammar भाषा, लिपि और व्याकरण

मनुष्य बोलकर अपने भावों को व्यक्त करता है तथा आवश्यकता पढ़ने पर वह लिखकर भी मन की बात को स्पष्ट करता है। इन दोनों का मूल आधार ‘भाषा’ ही है। भाषा शब्द भाष धातु से बना है। इसका अर्थ है-बोलना। मनुष्य जिन ध्वनियों को बोलकर अपनी बात कहता है, उसे भाषा कहते हैं।

भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा मनुष्य बोलकर, सुनकर, लिखकर व पढ़कर अपने मन के भावों या विचारों को आदान – प्रदान करता है।

भाषा के रूप
भाषा के दो रूप हैं-



मौखिक भाषा – जब व्यक्ति अपने मन के भावों को बोलकर व्यक्त करता है, तो वह भाषा का मौखिक रूप कहलाता है।
लिखित भाषा – जब व्यक्ति अपने मन के भावों को लिखकर व्यक्त करता है, तो वह भाषा का लिखित रूप कहलाता है।
लिपि – भाषा का प्रयोग करते समय हम सार्थक ध्वनियों का उपयोग करते हैं। इन्हीं मौखिक ध्वनियों को जिन चिह्नों द्वारा लिखकर व्यक्त किया जाता है, वे लिपि कहलाते हैं। लिपि की परिभाषा हम इस प्रकार दे सकते हैं

किसी भी भाषा के लिखने की विधि को लिपि कहा जाता है।
प्रत्येक भाषा के लिपि-चिह्न अलग-अलग होते हैं तथा उन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे हिंदी व संस्कृत भाषा की लिपि देवनागरी है। इसी प्रकार अंग्रेजी भाषा की लिपि रोमन, पंजाबी भाषा की लिपि गुरुमुखी और उर्दू भाषा की लिपि फ़ारसी है।
कुछ प्रसिद्ध भाषाएँ एवं उनकी लिपियों के नाम इस प्रकार हैं-

भाषा लिपि
हिंदी, संस्कृत, मराठी
पंजाबी
उर्दू, फ़ारसी
अरबी
बंगला
रूसी
अंग्रेज़ी, जर्मन, फ्रेंच, स्पेनिश
देवनागरी
गुरुमुखी
फ़ारसी
अरबी
बंगला
रूसी
रोमन

भारत में अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं; जैसे-हिंदी, संस्कृत, पंजाबी, उर्दू, कश्मीरी, बंगला, उड़िया, तेलुगु, असमिया, सिंधी, गुजराती, बोडो, डोगरी, मैथिली, कन्नड़, संथाली, मणिपुरी, कोंकणी, संथाली, मलयालम, नेपाली, मराठी। इस प्रकार अब भारत में निम्नलिखित 22 (बाईस) भाषाएँ प्रचलित हैं।

संस्कृत भाषा से ही हिंदी भाषा का जन्म हुआ है। 14 सितंबर, 1949 को हिंदी संविधान में भारत की राजभाषा स्वीकार की गई।

भारत के अधिकांश हिस्सों में यही भाषा बोली और समझी जाती है। हिंदी भाषा की पाँच उपभाषाएँ हैं।

उपभाषा बोली
1. पूर्वी हिंदी
2. राजस्थानी हिंदी
3. पहाड़ी हिंदी
4. पश्चिमी हिंदी
5. बिहारी हिंदी
अवधी, बघेली, छत्तीसगढ़ी
जयपुरी, मारवाड़ी, मेवाती, मालवी
गढ़वाली, कुमाउँनी, हिमाचली
खड़ीबोली, हरियाणवी, कन्नौजी, ब्रज भाषा
भोजपुरी, मैथिली, मगही।

बोली – सीमित क्षेत्रों में बोली जाने वाली भाषा के रूप को बोली कहा जाता है अर्थात स्थानीय व्यवहार में अल्पविकसित रूप में प्रयुक्त होने वाली भाषा बोली कहलाती है। बोली का कोई लिखित रूप नहीं होता।
व्याकरण – भाषा को शुद्ध रूप में लिखना, पढ़ना और बोलना सिखाने वाला शास्त्र व्याकरण कहलाता है।

बहुविकल्पी प्रश्न

1. भाषा कहते हैं
(i) भावों के आदान-प्रदान के साधन को
(ii) लिखने के ढंग को
(iii) भाषण देने की कला को
(iv) इन सभी को

2. लिपि कहते हैं।
(i) भाषा के शुद्ध प्रयोग को
(ii) मौखिक भाषा को
(iii) भाषा के लिखने की विधि को
(iv) इन सभी को

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