Type of Anti Transpirants

Type of Anti Transpirants

 Type of Anti transpirants


1. रंध्र बंद करने वाले: 2,4-डी, एट्राज़ीन, पीएमए, फ़ॉस्फ़ोन डी, पोटेशियम मेटाबाइसल्फाइट

2. फिल्म निर्माण करने वाले: हेक्साडेकोनॉल, स्टाइल अल्कोहल, पैक्लोबुट्राजोल, मोबाइलफ, वैक्सोल, एस-800, हिको-110आर, फोलिकॉट, सिलिकॉन

3. परावर्तक प्रकार: काओलिन (5 प्रतिशत), चीनी मिट्टी, कैल्शियम बाइकार्बोनेट, चूने का पानी

4. वृद्धि रोधक प्रकार: साइकोसेल (सीसीसी), फॉस्फर
बीटल  की बकरी नस्ल ( Breed of Goat - Beetal)

बीटल की बकरी नस्ल ( Breed of Goat - Beetal)

  बीटल बकरी




उद्गम :- पंजाब का गुरदासपुर जिला

यह नस्ल एक अच्छी दुधारू नस्ल है

जमुनापारी के बाद बकरी की दूसरी सबसे बड़ी नस्ल।

नर के पास दाढ़ी होती है लेकिन मादा दाढ़ी रहित होती है।

 विशिष्ट विशेषताएं - रोमन नाक, सफेद आंख (रेटिना), और लंबे पेंडुलस कान।

औसत उपज – 2 लीटर/दिन

एकाधिक जन्म – 30-50 %

जमुनापारी की बकरी नस्ल ( Breed of Goat - Jamanapari )

जमुनापारी की बकरी नस्ल ( Breed of Goat - Jamanapari )

जमुनापारी बकरी


▫️ उत्पति: इटावा, आगरा, मथुरा (यूपी)

▫️ 
यह भारत में बकरी की सबसे बड़ी और सबसे राजसी नस्ल है। बकरी की सबसे लंबी नस्ल।

▫️ मांस और दूध के उद्देश्य के लिए नस्लें (दोहरे उद्देश्य)

▫️ शरीर भार- M - 50-60 किग्रा, F = 40-50 किग्रा

▫️ इस नस्‍ल का नाक कोनवेक्‍स तथा उस पर बालो का गुच्‍छा होता है जिसे रोमन नाक कहते है, तथा इसका मुख तोतापुरी होता है।

▫️ पीछे की जांघों पर बालों का गुच्छा।

▫️ उच्चतम स्तनपान अवधि बकरी।

▫️ दुग्ध औसत दैनिक उपज 1.5 से 2.0 किग्रा प्रति दिन के साथ दुग्ध उत्पादन लगभग एक ब्यात में 200 किग्रा

टपक सिंचाई अथवा ड्रिप विधि (Drip or Trickle Method of Irrigation) लाभ एवं हानियाँ

टपक सिंचाई अथवा ड्रिप विधि (Drip or Trickle Method of Irrigation) लाभ एवं हानियाँ

 

टपक सिंचाई अथवा ड्रिप विधि (Drip or Trickle Method of Irrigation) लाभ एवं हानियाँ




टपक सिंचाई अथवा ड्रिप विधि (Drip or Trickle Method of Irrigation)


यदि हमारे फार्म (प्रक्षेत्र) पर पानी की कमी है तो खरबूजा की खेती के लिये सिंचाई की ड्रिप अथवा ट्रिकिल सिंचाई विधि (Drip or Trickle Method of Irrigation) का प्रयोग करेंगे।


ड्रिप अथवा ट्रिकिल सिंचाई विधि- सबसे पहले सिंचाई की इस विधि का प्रचलन इजराइल देश में हुआ था। किन्तु अब इस विधि का प्रयोग उन सभी क्षेत्रों में किया जाने लगा है जहाँ पानी की कमी है तथा जल लवणीय है। इस विधि में जल पौधों की जड़ों में बूँद-बूँद के रूप में ड्रिपर्स द्वारा टपकाकर दिया जाता है। इस विधि में प्रत्येक पौधे के पास प्लास्टिक पाइप लगा होता है। जिसका सीधा सम्बन्ध पानी लाने वाले पाइप से होता है।


इस विधि में पानी को प्लास्टिक पाइप (PVC पाइप) के द्वारा ड्रिपर्स (पानी उगलने वाले छिद्रों) तक, जो कि सहायक नलों में लगे या बने होते हैं, पहुँचाया जाता है। ये सहायक पाइप पौधों की पंक्तियों के अगल-बगल में बिछाये जाते हैं। ड्रिपर्स में पानी का दबाव कम करने की व्यवस्था होती है। अतः पानी लगभग न्यूनतम अथवा शून्य दबाव पर ही बूंदों के रूप में बाहर टपकता है। इसी आधार पर इस विधि का नाम ड्रिप या ट्रिकिल सिंचाई विधि रखा गया है। इस विधि का संचालन निम्नलिखित उपकरणों द्वारा सम्पन्न होता है-


(i) पानी का स्रोत (पम्प सैट), फिल्टर, कन्ट्रोल वाल्व, फलश वाल्व, प्रेशर गेज, पानी का मीटर


(ii) उर्वरक बॉक्स तथा उर्वरक बॉक्स में लगे पाइप


(iii) मुख्य प्रवाह धारा


मुख्य प्रवाह धारा जो कि 38 मिमी० उपमुख्य धारा के नलों में जल प्रवाहित करती है। इस उपमुख्य लाइन में 12.7 मिमी० वाली लचीली P.V.C. पाइप 90° के कोण पर भूमि के धरातल पर बिछायी जाती है। इन लचीली पाइप में पानी उगलने वाले डिपर्स लगे होते हैं। इन ड्रिपर्स की दूरी भूमि की किस्म तथा फसल के अनुसार निर्धारित की जाती है। सामान्यतः प्रत्येक ड्रिपर्स का जल प्रवाह 2 लीटर प्रति घण्टा रखा जा सकता है। इस सिंचाई का उद्देश्य पौधों के सीधे मूल क्षेत्र में बिना दबाव डाले उतना जल प्रवाहित करने से है जितना कि उनकी प्रतिदिन की जल की आवश्यकता होती है।


टपक सिंचाई अथवा ड्रिप विधि के लाभ एवं हानियाँ


लाभ-(i) सिंचाई के सभी पानी का सदुपयोग होता है।

(ii) तेज वायु चलने पर भी सिचाई में कोई परेशानी नहीं होती है। जबकि बौछारी सिंचाई में तेज वायु में समान सिंचाई नहीं हो पाती।

(iii) सिंचाई में 50% पानी की बचत हो जाती है।

(iv) सभी पौधों को पानी समान रूप में मिलता है।

(v) खेतों को समतल करने की आवश्यकता नहीं होती।

(vi) नाली, मेंड, बरहा नहीं बनाने पड़ते हैं।

(vii) शुष्क क्षेत्रों में सिंचाई की यह विधि अधिक उपयोगी है।

(viii) यह विधि उर्वरक देने तथा लवणयुक्त पानी का प्रयोग किये जाने के लिये भी उपयुक्त है।

हानियाँ-(i) प्रारम्भिक व्यय अधिक होता है।

(ii) चलाने के लिये दक्ष श्रमिक और साफ पानी की आवश्यकता होती है।

(iii) मरम्मत में असुविधा एवं व्यय करना पड़ता है।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा 'जेट' 14 मई 2023 को / JET exam Date Release 14 May 2023

संयुक्त प्रवेश परीक्षा 'जेट' 14 मई 2023 को / JET exam Date Release 14 May 2023

संयुक्त प्रवेश परीक्षा 'जेट' 14 मई को

जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यालय में सोमवार को प्रदेश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों तथा राज. पशु विज्ञान एवं चिकित्सा विश्वविद्यालय बीकानेर में स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2023 के आयोजन के लिए बैठक की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता कुलपति प्रो बी आर चौधरी ने की।

बैठक की चर्चा के बाद जेट परीक्षा 14 मई को प्रदेश के विभिन्न केन्द्रों पर कराने का निर्णय किया गया। बैठक में सभी कृषि विवि के प्रतिनिधियों के अलावा कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के संकायध्यक्ष डॉ. सीताराम कुम्हार, निदेशक छात्र कल्याण डॉ. वीरेन्द्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ मनमोहन सुंदरिया आदि ने भाग लिया।

Scientific name of all crops ( प्रमुख फसलों, सब्जी व फलों के वैज्ञानिक नाम )

Scientific name of all crops ( प्रमुख फसलों, सब्जी व फलों के वैज्ञानिक नाम )

🌳🌺 प्रमुख वैज्ञानिक नाम 🌳🌺

➭ गेहूँ - टिटिकम एस्टाइवम
➭ चावल - ओराइजा सेटाइवा
➭ मक्का - जीआ मेज
➭ बाजरा - पेनिसिटम टाइफाइडिस
➭ चना - साइसर ऐराइटिनम
➭ अरहर - केजेनस केजन
➭ मटर - पाइसम सेटाइवम
➭ मूँगफली - ऐरेकिस हाइपोजिया
➭ सोयाबीन - ग्लाईसिन मैक्स
➭ कॉफी - काफिया अरेबिका
➭ चाय - कामेलिया साइनेन्सि 


सब्जियाँ

➛ जड़ों से प्राप्त :-

➭ गाजर - डाकस करौटा
➭ शलजम - ब्रेसिका रापा
➭ मूली - रेफेनस सेटाइवम
➭ शकरकन्द - आइपोमिया बटाटास

➛ स्तम्भ से प्राप्त :-

➭ आलू - सोलेनम ट्यूबरोसम
➭ अरबी - कोलोकेसिया एस्कुलेंटा

➛ पर्ण से प्राप्त :- 

➭ पालक -  स्पाइनेसिया ओलेरेसिया
➭ मेथी - टाइगोनेला फोइनमग्रिकम
➭ बथुआ - चिनोपोडियम एल्बम

➛ पुष्पक्रम से प्राप्त :-

➭ फूल गोभी - ब्रैसिका ओलेसरेसिया किस्म बोटाइटिस

➛ फल से प्राप्त :-

➭ टमाटर - लाइपर्सिकोन एस्कुलेन्टम
➭ बैंगन - सोलेनम मेलोन्जिना
➭ भिण्डी - एबलमास्क्स एस्कुलेंट्स
➭ ग्वारफली - साइमोप्सिस टेटागोलोनोबा

फल :-

➭ आम - मैंजीफेरा इण्डिका
➭ केला - म्युजा पेराडिसियेका
➭ संतरा - सिटस रेटिकुलेटा
➭ अमरूद - सीडियम गुआजावा
➭ पपीता - केरिका पपाया
➭ सीताफल - एनोना स्क्वेमोसा

➛ स्तम्भ से प्राप्त :-

➭ हल्दी - कुरकुमा लौंगा
➭ अदरक - जिन्जिबर आफिसिनेल
➭ लहसुन - एलियम सेटाइवम
➭ गूगल - कोमिफोरा वाइटाई

➛ मूल से प्राप्त :-

➭ सर्पगन्धा - रावल्फिया सर्पेन्टाइना
➭ सफेद मूसली - क्लोरोफाइटम ट्यूबरोसम
➭ अश्वगंधा - विथानिया सोम्निफेरा

➛ छाल से प्राप्त :-

➭ कुनैन - सिनकोना आफिसिनेलिस
➭ अर्जुन - टर्मिनेलिया अर्जुना

➛ पर्ण से प्राप्त :-

➭ ग्वारपाठा - एलॉय वेरा
➭ ब्राहमी - सेन्टेला एशियाटिक
➭ तुलसी - ओसीमम सेन्कटम

➛ फल से प्राप्त :-

➭ अफीम - पेपेवर सोम्निफेरम
➭ आँवला - एम्बलिका आफिसिनेलिस

अन्य वैज्ञानिक नाम

➭ जूट - कोरकोरस कैप्सूलेरिस
➭ कपास - गोसिपियम जातियाँ
➭ सनई - क्रोटोलेरिया जुन्शिया
➭ नारियल - कोकोस न्यूसिफेरा
➭ सागवान - टैक्टोना ग्रन्डिस
➭ साल - शोरिया रोबस्टा
➭ शीशम - डेल्बर्जिया  सिस्सू
➭ रोहिड़ा या मारवाड़ सागवान - टेकामेला अन्डुलेता
➭ खेजड़ी - प्रोसोपिस सिनेरेरिया
➭ देवदार - सीडस देवदारा
➭ लाख कीट - लैसीफेर लैका

Thank You 🤗